Wednesday, August 15, 2007

ऐसे सरकारी ब्लॉगों पर ब्लॉग जगत क्या करे?

जरा कोई बताए ये सरकारी ब्लॉग हिंदी, या फिर ब्लॉगिंग को किस दिशा में ले जा रहे हैं? क्या इनके आगमन को ब्लॉगिंग की विषय-वस्तु में विविधता मानते हुए आनंदित हों, या फिर इनसे आग्रह करें कि भाई अपनी सरकारी फाइलों का ब्यौरा देकर ब्लॉग जगत को क्यों समृद्ध कर रहे हो?

पहला ब्लॉग बाड़मेर पुलिस का है और बाकायदा ब्लॉग एग्रीगेटरों पर उसका ब्यौरा आता है। ताजा पोस्ट पंद्रह अगस्त की ही है और शीर्षक है, दर्ज अपराध। आगे लिखते हैं- श्री नरपत सिंह पुत्र तेज सिंह जाट नि० बायतु चिमनजी ने मुलजिम बाला राम पुत्र देवा राम कुम्हार नि० सोनडी द्वारा स्कार्पियो गाडी न० आरजे ०४ युए ४३१ को तेज गति व लापरवाही से चलाकर मुस्तगिस की मोटर साईकिल के टक्कर मारना आदि धारा २७९, ३३७ भा० द० स० के तहत थाना सदर पर मुकदमा दर्ज करवाया ।

http://barmerpolice.blogspot.com/2007/08/blog-post_15.html

अब एक और ब्लॉग देखिए। नाम है चंबल की आवाज, और पहली पोस्ट है- पंचायत मंत्री श्री रूतम सिंह '' विशेष भोज ' में शामिल हुए। आगे लिखते हैं- पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह प्राथमिक विद्यालय नूरावाद में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत आयोजित '' विशेष भोज'' मे बच्चों के साथ शामिल हुए । उल्लेखित है कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रायमरी स्कूलों में भोजन के तहत सब्जी पूड़ी , खीर अथवा हलुआ और लड्डू का वितरण विशेष भोज के रूप में किया गया ।

http://chambal.spaces.live.com/Blog/cns!4807A954F164E8D0!4595.entry

दोनों ब्लॉगों का आद्योपांत अध्ययन करने के बाद समझ नहीं आया कि मैंने इनसे क्या पाया, क्या खोया! सुधीजन आप ही बताएं कि हिंदी ब्लॉगों की बढ़ती संख्या पर आपके क्या विचार हैं?

आपकी ब्लॉगदुनिया में अब हम भी

मित्रो, हिंदी के क्षेत्र में निरंतर मेहनत कर रहे ब्लॉगर बंधुओं की दाद देते हुए मैं अपना नया ब्लॉग शुरू करना चाहता हूं। दाद इसलिए कि आप लोगों ने भारत में आई.टी. की कमजोर स्थिति और सुविधाओं की कमी के बावजूद ब्लॉगिंग जारी रखी। अंग्रेजी में तो इस क्षेत्र में तमाम तरह का विकास हो गया है और लोग ब्लॉगों से धन भी अर्जित कर रहे हैं लेकिन हिंदी में तो अपनी बात कहने की आजादी, आपसी प्रोत्साहन और सोशल नेटवर्किंग के अलावा ब्लॉगिंग के प्रति लगन बनाए रखने के इन्स्पाइरिंग फैक्टर बहुत कम हैं।

मैंने हिंदी ब्लॉग जगत का काफी अध्ययन किया है और जीतेन्द्र चौधरी, देबाशीष, अनूप शुक्ला, उड़न तश्तरी, मसिजीवी, रवि रतलामी, रमन कौल, आलोक कुमार, जगदीश भाटिया, पंकज नरूला, सृजन शिल्पी, सुनील दीपक, जैसे पायोनियर्स की लगन से बेहद प्रभावित हूं। प्रत्यक्षा, अविनाश, नीलिमा, शशि सिंह, नीरज दीवान, श्रीश, शास्त्री फिलिप, जयप्रकाश मानस, अतुल अरोरा, घुघुती बासुती, ज्ञानदत्त पांडे, अनामदास, काकेश, बालेन्दु शर्मा दधीच, आलोक पुराणिक, रवीश कुमार, प्रमोद अभय तिवारी आदि भी कमाल का लिखते हैं और कितनी लगन के साथ लिखते हैं। आप सब हम जैसे नए लोगों को बहुत इन्स्पायर करते हैं। आपकी ब्लॉगिंग में हिंदी की सेवा निहित है क्योंकि ये सब तकनीकी प्रगति उसे नए-नए मोर्चों पर आगे बढ़ने का हौंसला देती है।

मैं अपने ब्लॉग पर ब्लॉगों के ही बारे में टिप्पणियां करने की कोशिश करूंगा- हिंदी ही नहीं, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के भी ब्लॉग। कोशिश रहेगी कि कम से कम हर दो-तीन दिन में एक पोस्ट तो हो ही जाए। आप सबका और अन्य सभी ब्लॉगर बंधुओं का सहयोग एवं प्रोत्साहन चाहूंगा। अपनी पहली पोस्ट में आप सबको ब्लॉग जगत के प्रति अद्वितीय योगदान के लिए बधाई।