Wednesday, August 15, 2007

आपकी ब्लॉगदुनिया में अब हम भी

मित्रो, हिंदी के क्षेत्र में निरंतर मेहनत कर रहे ब्लॉगर बंधुओं की दाद देते हुए मैं अपना नया ब्लॉग शुरू करना चाहता हूं। दाद इसलिए कि आप लोगों ने भारत में आई.टी. की कमजोर स्थिति और सुविधाओं की कमी के बावजूद ब्लॉगिंग जारी रखी। अंग्रेजी में तो इस क्षेत्र में तमाम तरह का विकास हो गया है और लोग ब्लॉगों से धन भी अर्जित कर रहे हैं लेकिन हिंदी में तो अपनी बात कहने की आजादी, आपसी प्रोत्साहन और सोशल नेटवर्किंग के अलावा ब्लॉगिंग के प्रति लगन बनाए रखने के इन्स्पाइरिंग फैक्टर बहुत कम हैं।

मैंने हिंदी ब्लॉग जगत का काफी अध्ययन किया है और जीतेन्द्र चौधरी, देबाशीष, अनूप शुक्ला, उड़न तश्तरी, मसिजीवी, रवि रतलामी, रमन कौल, आलोक कुमार, जगदीश भाटिया, पंकज नरूला, सृजन शिल्पी, सुनील दीपक, जैसे पायोनियर्स की लगन से बेहद प्रभावित हूं। प्रत्यक्षा, अविनाश, नीलिमा, शशि सिंह, नीरज दीवान, श्रीश, शास्त्री फिलिप, जयप्रकाश मानस, अतुल अरोरा, घुघुती बासुती, ज्ञानदत्त पांडे, अनामदास, काकेश, बालेन्दु शर्मा दधीच, आलोक पुराणिक, रवीश कुमार, प्रमोद अभय तिवारी आदि भी कमाल का लिखते हैं और कितनी लगन के साथ लिखते हैं। आप सब हम जैसे नए लोगों को बहुत इन्स्पायर करते हैं। आपकी ब्लॉगिंग में हिंदी की सेवा निहित है क्योंकि ये सब तकनीकी प्रगति उसे नए-नए मोर्चों पर आगे बढ़ने का हौंसला देती है।

मैं अपने ब्लॉग पर ब्लॉगों के ही बारे में टिप्पणियां करने की कोशिश करूंगा- हिंदी ही नहीं, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के भी ब्लॉग। कोशिश रहेगी कि कम से कम हर दो-तीन दिन में एक पोस्ट तो हो ही जाए। आप सबका और अन्य सभी ब्लॉगर बंधुओं का सहयोग एवं प्रोत्साहन चाहूंगा। अपनी पहली पोस्ट में आप सबको ब्लॉग जगत के प्रति अद्वितीय योगदान के लिए बधाई।

2 comments:

Udan Tashtari said...

आईये अरुण भाई,स्वागत है. अब निरन्तर लिखिये.

आप अपने नाम के साथ अप्रवासी लगाते हैं. कल ही यहाँ टोरंटो में एक कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर रहा था तब एक रोचक प्रसंग के तहत अप्रवासी की जगह भारतवंशी शब्द का इस्तेमाल देख अच्छा लगा.

बस यूँ ही सोचा कि बताता चलूँ.

बहुत शुभकामनायें.

ePandit said...

स्वागत है अरुण भाई आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में। एक दिन हमें भी आपकी तरह हिन्दी की दुनिया ऐसे ही खींच लाई थी। सच है अपनी भाषा में ब्लॉगिंग का मजा ही कुछ और है।

यदि आपने अपना चिट्ठा अभी नारद पर रजिस्टर नहीं किया तो अवश्य करें।

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