जरा कोई बताए ये सरकारी ब्लॉग हिंदी, या फिर ब्लॉगिंग को किस दिशा में ले जा रहे हैं? क्या इनके आगमन को ब्लॉगिंग की विषय-वस्तु में विविधता मानते हुए आनंदित हों, या फिर इनसे आग्रह करें कि भाई अपनी सरकारी फाइलों का ब्यौरा देकर ब्लॉग जगत को क्यों समृद्ध कर रहे हो?
पहला ब्लॉग बाड़मेर पुलिस का है और बाकायदा ब्लॉग एग्रीगेटरों पर उसका ब्यौरा आता है। ताजा पोस्ट पंद्रह अगस्त की ही है और शीर्षक है, दर्ज अपराध। आगे लिखते हैं- श्री नरपत सिंह पुत्र तेज सिंह जाट नि० बायतु चिमनजी ने मुलजिम बाला राम पुत्र देवा राम कुम्हार नि० सोनडी द्वारा स्कार्पियो गाडी न० आरजे ०४ युए ४३१ को तेज गति व लापरवाही से चलाकर मुस्तगिस की मोटर साईकिल के टक्कर मारना आदि धारा २७९, ३३७ भा० द० स० के तहत थाना सदर पर मुकदमा दर्ज करवाया ।
http://barmerpolice.blogspot.com/2007/08/blog-post_15.html
अब एक और ब्लॉग देखिए। नाम है चंबल की आवाज, और पहली पोस्ट है- पंचायत मंत्री श्री रूतम सिंह '' विशेष भोज ' में शामिल हुए। आगे लिखते हैं- पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह प्राथमिक विद्यालय नूरावाद में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत आयोजित '' विशेष भोज'' मे बच्चों के साथ शामिल हुए । उल्लेखित है कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रायमरी स्कूलों में भोजन के तहत सब्जी पूड़ी , खीर अथवा हलुआ और लड्डू का वितरण विशेष भोज के रूप में किया गया ।
http://chambal.spaces.live.com/Blog/cns!4807A954F164E8D0!4595.entry
दोनों ब्लॉगों का आद्योपांत अध्ययन करने के बाद समझ नहीं आया कि मैंने इनसे क्या पाया, क्या खोया! सुधीजन आप ही बताएं कि हिंदी ब्लॉगों की बढ़ती संख्या पर आपके क्या विचार हैं?
Wednesday, August 15, 2007
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5 comments:
ब्लाग दुनिया की कमी थी. आपने पूरा कर दिया. अब बने रहिएगा.
और आपके सवाल पर मेरा कहना यह है कि सब अपनी समझ से लिखते हैं और अपनी समझ से पढ़ते हैं. हो सकता है इन जानकारियों का मेरे लिए कोई मतलब न हो लेकिन कौन जाने किस जानकारी का कौन कैसे उपयोग करता है.
मैं भी संजय की बात दोहराना चाहूँगा- अन्यों की उपयोगिता पर निर्णय देने से पहले थमें-
खासकर बाढ़मेर पुलिस के ब्लॉग का साफ महत्व है, पहली बार एक सरकारी महकमा सूचनाओं को अपनी पहल पर उपलब्ध करा रहा है, शायद किसी शोध करने वाले के लिए उनका महत्व भी हो इसलिए सूचनाओं के सृजन व प्रवाह पर आपत्ति हमें तो उचित नहीं जान पड़ती।
हो सकता है कि बाड़मेर पुलिस के ब्लॉग का हमारे लिए महत्व न हो लेकिन बाड़मेर की जनता के लिए ये अवश्य उपयोगी होगा। यह कदम पुलिस के कामकाज में पारदर्शिता लाने वाला है।
शायद सच ये है कि नए माध्यम से परिचित होना चाहते है। लिख कर थोड़ी भड़ास भी निकालना चाहते है, लेकिन एक बात तो पक्की है आप का ब्लॉग भाहूत भड़िया हे
क्या आप ए सब हिंदी मे छाप ने के लिए quillpad.in/hindi उपयोग किया
आज पहली बार आपके चिट्ठे पर आया एवं आपकी रचनाओं का अस्वादन किया. आप अच्छा लिखते हैं, लेकिन आपकी पोस्टिंग में बहुत समय का अंतराल है. सफल ब्लागिंग के लिये यह जरूरी है कि आप हफ्ते में कम से कम 3 पोस्टिंग करें. अधिकतर सफल चिट्ठाकार हफ्ते में 5 से अधिक पोस्ट करते हैं. -- शास्त्री जे सी फिलिप
मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार !!
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